इतिहास
भारत में मीट्रिक प्रणाली लागू होने से पहले ही, बाट एवं माप के लिए एक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की आवश्यकता को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया था। इसके परिणामस्वरूप कई राज्यों, विशेषकर महाराष्ट्र सरकार एवं बिहार सरकार ने, अपने प्रवर्तन अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान करने की पहल की। इसका उद्देश्य न केवल मानकों की एकरूपता बनाए रखना था, बल्कि देश के उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी था। ज्ञातव्य है कि वर्ष 1962 में बिहार सरकार ने पटना में “अखिल भारतीय बाट माप प्रशिक्षण संस्थान” नामक एक योजना को केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में स्थापित किया। बाद में वर्ष 1970 में इसके समुचित विकास हेतु भारत सरकार ने इसकी समस्त परिसंपत्तियों एवं दायित्वों सहित इसे अपने अधीन ले लिया। यह भी उल्लेखनीय है कि प्रारंभ में इस संस्थान को जर्मन सरकार के सहयोग के अंतर्गत संचालित किया गया था तथा जर्मन विशेषज्ञों की अनुशंसा पर वर्ष 1974 में इस संस्थान को रांची स्थानांतरित कर दिया गया। इसके साथ ही इसका नया नाम “भारतीय विधिक माप विज्ञान संस्थान” रखा गया।





